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सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के पारंपरिक उपाय
बहà¥à¤¤ सी नई माà¤à¤“ं को चिंता रहती है कि वे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ सà¥à¤¤à¤¨ दूध का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ नहीं कर पा रही हैं। मगर यदि आपका शिशॠसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ है और उस​का विकास सही दर से हो रहा है तो इस बात की पूरी संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ है कि आपके दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ ठीक है। सेहतमंद, संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और वि​विध आहार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने वाली माठके साथ-साथ शिशॠके लिठà¤à¥€ बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ है। कà¥à¤› खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ जैसे कि मेथी, सौंफ और लहसà¥à¤¨ आदि सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने (गैलेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤—ॉग) के लिठकाफी लो​कपà¥à¤°à¤¿à¤¯ माने जाते हैं। हालांकि, सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के लिठकोई à¤à¥€ हरà¥à¤¬à¤² उपचार लेने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से अवशà¥à¤¯ पूछ लें। साथ ही, यदि आपको लगे कि शिशॠपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध नहीं मिल रहा है, तो शिशॠके डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
कैसे पता चलेगा कि मेरे सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध बन रहा है या नहीं?
जब आप अपने शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना शà¥à¤°à¥ करती हैं, तो दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ को लेकर चिंतित होना à¤à¤• सामानà¥à¤¯ बात है।
यह चिंता करने वाली आप अकेली नहीं हैं। और à¤à¥€ बहà¥à¤¤ सी à¤à¤¸à¥€ माà¤à¤‚ हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने दूध की मातà¥à¤°à¤¾ के साथ-साथ इस बात कि चिंता रहती है कि बढ़ती जरà¥à¤°à¤¤à¥‹à¤‚ की पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठशिशॠको परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध मिल पा रहा है या नहीं।
शिशॠका वजन बढ़ना और उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उसका सही विकास, इस बात के सबसे अचà¥à¤›à¥‡ संकेत है कि आप परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ कर रही हैं। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ के कà¥à¤›à¥‡à¤• दिनों में नवजात का वजन घटना सामानà¥à¤¯ है, लेकिन जनà¥à¤® के तीन से पांच दिन बाद फिर से उसका वजन बढ़ने लगता है। आमतौर पर, जब शिशॠ14 दिन का हो जाता है, तो उसका वजन फिर से उतना ही हो जाता है, जितना कि जनà¥à¤® के समय था।
नीचे कà¥à¤› और संकेत à¤à¥€ दिठगठहैं, जिनसे पता चल सकता है कि शिशॠमिलने वाली दूध की मातà¥à¤°à¤¾ से संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ है। जैसे:
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना आरामदायक है और इस दौरान आपको कोई दरà¥à¤¦ महसूस नही होता।
आपका नवजात दिन में छह से आठबार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कर रहा है और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बाद वह संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ दिखता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के बाद आपके सà¥à¤¤à¤¨ खाली और मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® लगते हैं।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करते हà¥à¤ आप शिशॠको दूध गटकते हà¥à¤ देख व सà¥à¤¨ सकती हैं।
जब शिशॠका पेट à¤à¤° जाता है, तो वह सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही अपना मà¥à¤‚ह सà¥à¤¤à¤¨ से हटा लेता है।
आपका शिशॠ24 घंटे में कम से कम छह बार पेशाब कर रहा है। उसका मल पीला और ढेलेदार है, जो कि फटे हà¥à¤ दूध के समान दिखता है। अननà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले शिशॠà¤à¤• दिन में बहà¥à¤¤ बार या फिर पांच दिन में à¤à¤• बार मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— कर सकते हैं। दोनों ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¤•दम सामानà¥à¤¯ हैं।
कम सà¥à¤¤à¤¨ दूध आपूरà¥à¤¤à¤¿ की आशंका वाले जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में असली समसà¥à¤¯à¤¾ यह नहीं होती कि आप कितने दूध का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ कर पा रही हैं। बलà¥à¤•ि समसà¥à¤¯à¤¾ यह होती है कि आपका शिशॠकितना दूध पीने में सकà¥à¤·à¤® है। सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि शिशॠसà¥à¤¤à¤¨ को सही ढंग से मà¥à¤‚ह में ले, ताकि आपके पास जितना दूध है, उसे वह कà¥à¤¶à¤²à¤¤à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• निकाल सके।
अगर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने में आपको दरà¥à¤¦ महसूस होता हो, तो शिशॠके मà¥à¤‚ह में सà¥à¤¤à¤¨ सही ढंग से देने (लैचिंग) के बारे में सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ विशेषजà¥à¤ž की मदद लें। जब आप इसका पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कर रही हों, तब आप अपना दूध निकालकर यानि à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤¸ करके शिशॠको चमà¥à¤®à¤š या पलड़ाई की मदद से पिला सकती हैं। सà¥à¤¤à¤¨ दूध à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤¸ करने से आपके शरीर को और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध बनाने का पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¨ मिलेगा और फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पर निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ कम होगी।
सà¥à¤¤à¤¨ दूध की जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आपूरà¥à¤¤à¤¿ बनाने और उसे जारी रखने के लिठशिशॠको बार-बार और जब वह चाहे तब सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। अगर, आपका नवजात काफी अधिक सोता है, तो हो सकता है आपको उसे नींद से जगाकर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने के लिठसौमà¥à¤¯à¤¤à¤¾ से पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करना पड़े। यह आपके सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को और अधिक दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ करने के लिठउतà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करेगा।
आपका शरीर मांग के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° आपने दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में बदलाव करता रहता है। इसलिà¤, यदि आप शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨ दूध की बजाय फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध या अनà¥à¤¯ अनà¥à¤ªà¥‚रक (सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट) देना शà¥à¤°à¥ करती हैं, तो आपके दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ कम हो जाà¤à¤—ी। आप शिशॠको जितना अधिक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराà¤à¤‚गी, आपका शरीर उतना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करेगा।
साथ ही, शिशॠको बार-बार अपनी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के संपरà¥à¤• में रखने (कंगारू मदर केयर) से सà¥à¤¤à¤¨ दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को बढ़ावा मिलेगा और इससे शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨ सही ढंग से मà¥à¤‚ह में लेने का पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¨ à¤à¥€ मिलता है।
अगर, आपको लगता है कि आप परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध नहीं बना पा रहीं हैं या फिर आप शिशॠके वजन को लेकर चिंतित हैं, तो इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करना बेहतर है। वह ही आपको जरà¥à¤°à¥€ सलाह या उपचार दे पाà¤à¤‚गी।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने वाली माà¤à¤“ं के लिठपेय (ऑडियो)
कौन से पेय सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, यहां सà¥à¤¨à¥‡à¤‚!
कौन से à¤à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं?
सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के लिठआप जो कà¥à¤› à¤à¥€ खाती या पीती हैं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में गैलेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤—ॉग कहा जाता है। यह à¤à¤• आम मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि कà¥à¤› विशेष à¤à¥‹à¤œà¤¨ व पेय सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, इस बारे में बहà¥à¤¤ सीमित शोध उपलबà¥à¤§ है और कà¥à¤› मामलों में तो इन पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ करने के लिठकोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• शोध à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ नहीं है। मगर, ये खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ कई पीढ़ियों से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं को दिठजाते रहे हैं और बहà¥à¤¤ सी मांà¤à¤‚ यह मानती à¤à¥€ हैं कि इन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मदद मिली है।
याद रखें कि इन सà¤à¥€ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के हिसà¥à¤¸à¥‡ के तौर पर किया जाना चाहिà¤à¥¤ कोई à¤à¥€ हरà¥à¤¬à¤² वाला या पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक अनà¥à¤ªà¥‚रक (सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट) डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बिना नहीं लें।
मेथी के बीज
दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के लिठमेथी के बीजों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² विशà¥à¤µ à¤à¤° में कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। इस पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ धारणा के समरà¥à¤¥à¤¨ के लिठकà¥à¤› शोध उपलबà¥à¤§ है, मगर ये इसकी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ करने के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं है।
मेथी के बीजों में ओमेगा-3 वसा जैसे सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विटामिन होते हैं, जो सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माठके लिठअचà¥à¤›à¥‡ रहते हैं। ओमेगा-3 वसा शिशॠके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• विकास के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। मेथी के साग में बीटाकैरोटीन, बी विटामिन, आयरन और कैलà¥à¤¶à¥à¤¯à¤¿à¤® à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में होते है।
मेथी की चाय नई मांओं को दिया जाने वाला à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ पेय है। मेथी वैसे à¤à¥€ कई वà¥à¤¯à¤‚जनों में डाली जा सकती है, विशेषकर सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और मांस के वà¥à¤¯à¤‚जनों में। इसे आटे में मिलाकर परांठे, पूरी या à¤à¤°à¤µà¤¾à¤‚ रोटी à¤à¥€ बनाई जा सकती है।
मेथी, पौधों के उसी वरà¥à¤— से संबंध रखती है, जिसमें मूंगफली, छोले और सोयाबीन के पौधे à¤à¥€ शामिल हैं। इसलिà¤, अगर आपको इनमें से किसी के à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो आपको मेथी से à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है।
सौंफ
सौंफ à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने का à¤à¤• अनà¥à¤¯ पारंपरिक उपाय है। शिशॠको गैस और पेट दरà¥à¤¦ की परेशानी से बचाने के लिठà¤à¥€ नई माठको सौंफ दी जाती है। इसके पीछे तरà¥à¤• यह है कि पेट में गड़बड़ या पाचन में सहायता के लिठवयसà¥à¤• लोग सौंफ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते हैं, इसलिठसà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध के जरिये सौंफ के फायदे शिशॠतक पहà¥à¤‚चाने के लिठयह नई माठको दी जाती है। हालांकि, इन दोनों धारणाओं के समरà¥à¤¥à¤¨ के लिठकोई शोध उपलबà¥à¤§ नहीं है, मगर बहà¥à¤¤ सी माताà¤à¤‚ मानती हैं कि सौंफ से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ या उनके शिशॠको फायदा मिला है।
सौंफ का पानी और सौंफ की चाय पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद à¤à¤•ांतवास के पारंपरिक पेय हैं।
लहसà¥à¤¨
लहसà¥à¤¨ में बहà¥à¤¤ से रोगनिवारक गà¥à¤£ पाठजाते हैं। यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को फायदा पहà¥à¤‚चाता है और दिल की बीमारियों से बचाता है। इसके साथ-साथ लहसà¥à¤¨ सà¥à¤¤à¤¨ दूध आपूरà¥à¤¤à¤¿ को बढ़ाने में à¤à¥€ सहायक माना गया है। हालांकि, इस बात की पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤•ता के लिठकोई जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ शोध उपलबà¥à¤§ नहीं है।
अगर, आप बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लहसà¥à¤¨ खाती हैं, तो यह आपके सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध के सà¥à¤µà¤¾à¤¦ और गंध को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। à¤à¤• छोटे अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में पाया गया कि जिन माताओं ने लहसà¥à¤¨ खाया था, उनके शिशà¥à¤“ं ने जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लंबे समय तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ किया। यानि कि हो सकता है शिशà¥à¤“ं को सà¥à¤¤à¤¨ दूध में मौजूद लहसà¥à¤¨ का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ पसंद आà¤à¥¤ हालांकि, यह अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ काफी छोटे सà¥à¤¤à¤° पर था और इससे कोई सारà¥à¤¥à¤• परिणाम नहीं निकाले जा सकते। वहीं, कà¥à¤› माà¤à¤‚ यह à¤à¥€ कहती हैं कि अगर वे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लहसà¥à¤¨ का सेवन करती हैं, तो उनके शिशà¥à¤“ं में पेट दरà¥à¤¦ हो जाता है।
लहसà¥à¤¨ का दूध पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं को दिया जाने वाला à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ पारंपरिक पेय है।
हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जैसे पालक, मेथी, सरसों का साग और बथà¥à¤† आदि आयरन, कैलà¥à¤¶à¥à¤¯à¤¿à¤® और फोलेट जैस खनिजों का बेहतरीन सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं। इनमें बीटाकैरोटीन (विटामिन à¤) का à¤à¤• रूप और राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨ जैसे विटामिन à¤à¥€ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में होते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨ दूध बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¤• या दो हिसà¥à¤¸à¥‡ हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ खाने की सलाह दी जाती है। आप इन सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मसालों के साथ पका सकती हैं या फिर थेपला, विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ डालकर पोहा या इडली जैसे नाशà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ बना सकती हैं।
जीरा
दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के साथ-साथ माना जाता है कि जीरा पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में सà¥à¤§à¤¾à¤° और कबà¥à¤œ, अमà¥à¤²à¤¤à¤¾ (à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€) और पेट में फà¥à¤²à¤¾à¤µ से राहत देता है। जीरा बहà¥à¤¤ से à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जनों का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग है और यह कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨ (à¤à¤• बी विटामिन) का सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ है।
आप जीरे को à¤à¥‚नकर उसे सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸, रायते और चटनी में डाल सकते हैं। आप इसे जीरे के पानी के रूप में à¤à¥€ पी सकती हैं।
तिल के बीज
तिल के बीज कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® का à¤à¤• गैर डेयरी सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माताओं के लिठकैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® à¤à¤• जरà¥à¤°à¥€ पोषक ततà¥à¤µ है। यह आपके शिशॠके विकास के साथ-साथ आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठà¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। शायद इसलिठही यह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माताओं के आहार में शामिल की जाने वाली सदियों पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ सामगà¥à¤°à¥€ है।
आप तिल के लडà¥à¤¡à¥‚ खा सकती हैं या फिर काले तिल को पूरी, खिचड़ी, बिरयानी और दाल के वà¥à¤¯à¤‚जनों में डाल सकती हैं। कà¥à¤› माà¤à¤‚ गजà¥à¤œà¤• व रेवड़ी में सफेद तिल इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना पसंद करती हैं।
तà¥à¤²à¤¸à¥€
तà¥à¤²à¤¸à¥€ की चाय सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं का à¤à¤• पारंपरिक पेय है। किसी शोध में यह नहीं बताया गया कि तà¥à¤²à¤¸à¥€ सà¥à¤¤à¤¨ दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ बढ़ाने में सहायक है, मगर माना जाता है कि इसका à¤à¤• शांतिदायक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होता है। यह मल पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¤à¥€ है और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ खाने की इचà¥à¤›à¤¾ को बढ़ावा देती है। मगर, अनà¥à¤¯ जड़ी-बूटियों की तरह ही तà¥à¤²à¤¸à¥€ का सेवन à¤à¥€ सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही किया जाना चाहिà¤à¥¤
सà¥à¤µà¤¾
सà¥à¤µà¤¾ के पतà¥à¤¤à¥‡ आयरन, मैगà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और कैलà¥à¤¶à¥à¤¯à¤¿à¤® का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं। माना जाता है कि सà¥à¤µà¤¾ सà¥à¤¤à¤¨ दूध आपूरà¥à¤¤à¤¿ में सà¥à¤§à¤¾à¤°, पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ व वात में आराम और नींद में सà¥à¤§à¤¾à¤° करता है। सà¥à¤µà¤¾ हलà¥à¤•ा मूतà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤§à¤• à¤à¥€ होता है, इसलिठइसका सीमित सेवन किया जाना चाहिà¤à¥¤
आप सà¥à¤µà¤¾ के बीज साबà¥à¤¤ या उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पीस कर अचार, सलाद, चीज़ सà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤¡ और तरी या सालन में डाल सकती हैं। सà¥à¤µà¤¾ की चाय पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद दिया जाने वाला à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ पेय है।
लौकी व तोरी जैसी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
पारंपरिक तौर पर माना जाता है कि लौकी, टिंडा और तोरी जैसी à¤à¤• ही वरà¥à¤— की सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करती हैं। ये सà¤à¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ न केवल पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ कम कैलोरी वाली हैं, बलà¥à¤•ि ये आसानी से पच à¤à¥€ जाती हैं।
दालें व दलहनें
दालें, विशेषकर कि मसूर दाल, न केवल सà¥à¤¤à¤¨ दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने में सहायक मानी जाती हैं, बलà¥à¤•ि ये पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ होती हैं। इनमें आयरन और फाइबर à¤à¥€ उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में होता है।
मेवे
माना जाता है कि बादाम और काजू सà¥à¤¤à¤¨ दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को बढ़ावा देते हैं। इनमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में कैलोरी, विटामिन और खनिज होते हैं, जिससे ये नई माठको ऊरà¥à¤œà¤¾ व पोषक ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤¨à¥ˆà¤•à¥à¤¸ के तौर पर à¤à¥€ खाया जा सकता है और ये हर जगह आसानी से उपलबà¥à¤§ होते हैं।
आप इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दूध में मिलाकर सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ बादाम दूध या काजू दूध बना सकती हैं। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माठके लिठपंजीरी, लडà¥à¤¡à¥‚ और हलवे जैसे पारंपरिक खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ बनाने में मेवों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
जई और दलिया
जई आयरन, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, फाइबर और बी विटामिन का बेहतरीन सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली मांओं के बीच ये काफी लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ है। पारंपरिक तौर पर जई को चिंता व अवसाद कम करने में सहायक माना जाता है।
इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आमतौर पर दलिये की तरह ही खाया जाता है। इसका पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• मूलà¥à¤¯ बढ़ाने के लिठआप इसमें मेवे, दूध, मसाले या फल à¤à¥€ डालकर खा सकती हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ मà¥à¤à¥‡ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध बनाने के लिठअधिक खाने-पीने की जरà¥à¤°à¤¤ है?
यह दो बातों पर निरà¥à¤à¤° करता है। à¤à¤• तो यह कि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने से पहले आपका बीà¤à¤®à¤†à¤ˆ सामानà¥à¤¯ था या नहीं और दूसरी यह कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान आपका वजन कितना बढ़ा।
अगर, गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने से पहले आपका वजन कम या सामानà¥à¤¯ था, तो सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान कैलोरी की जरà¥à¤°à¤¤ पूरा करने के लिठआपको थोड़ा अधिक à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाने की सलाह दी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ, यदि आपका वजन गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ से पहले जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ था और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान à¤à¥€ आपका अपेकà¥à¤·à¤¿à¤¤ वजन बढ़ा है, तो हो सकता है आपको कैलोरी की बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤•ता न हो। आपको अतिरिकà¥à¤¤ कैलोरी की जरà¥à¤°à¤¤ है या नहीं, इस बारे में आपकी डॉकà¥à¤Ÿà¤° ही बेहतर बता सकेंगी।
सामानà¥à¤¯ सलाह यही है, कि आप अपनी à¤à¥‚ख के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° चलें और जब à¤à¥€ à¤à¥‚ख लगे, खाना खाà¤à¤‚। आपका शरीर दूध का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करने में काफी कà¥à¤¶à¤² होता है। हो सकता है गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान शरीर ने वसा संगà¥à¤°à¤¹à¤¿à¤¤ करके रखी हो, जिसका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² सà¥à¤¤à¤¨ दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में किया जा सकता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान आपको पानी केवल अपनी पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ बà¥à¤à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठही पीने की जरà¥à¤°à¤¤ है। अतà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤• पानी पीने या पà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥‡ रहने से आपके दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ पर असर नहीं पड़ता है। आपका शरीर जरà¥à¤°à¥€ ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का नियमित संगà¥à¤°à¤¹à¤£ करने में काफी सकà¥à¤·à¤® होता है, ताकि वह आपकी दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ को बनाठरख सके।
हालांकि, इस बात पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के दौरान आपका शरीर ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ निकालता है, जिसकी वजह से आपको अधिक पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगती है। इसलिà¤, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराते समय पानी का गिलास अपन साथ ही रखें।
आपने गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान जिस सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ आहार योजना का पालन किया था, उस सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ किसà¥à¤® के आहार का सेवन आपको अब à¤à¥€ जारी रखना चाहिà¤à¥¤ इससे आपको अपनी और शिशॠकी जरà¥à¤°à¤¤ के सà¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µ मिल जाà¤à¤‚गे। हालांकि, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माठको रोजाना आयरन, फॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡, विटामिन बी और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® के अनà¥à¤ªà¥‚रक (सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट) लेने की सलाह दी जाती है। आपके आहार के बारे में जानने के बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपके लिठउचित अनà¥à¤ªà¥‚रक की सलाह देंगी और बताà¤à¤‚गी कि आपको इनकी कितनी खà¥à¤°à¤¾à¤• लेनी चाहिà¤à¥¤
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश से दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में मदद मिलती है?
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश करने से दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ नहीं बढ़ती है। मगर ये निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित मदद कर सकती है:
दूध निकलने की सà¥à¤µà¤¤: ​कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करना
अवरà¥à¤¦à¥à¤§ नलिकाओं को खोलना
नसों के गà¥à¤šà¥à¤›à¥‡ या गांठों और सखà¥à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को ढीला करना
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की सूजन (मैसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸) का खतरा à¤à¥€ कम करना
बहरहाल, सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश हलà¥à¤•े हाथों से की जानी चाहिà¤à¥¤ सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ पर बलपूरà¥à¤µà¤• मालिश करने से नलिकाओं को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है, जिससे सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से दूध बाहर निकल सकता है। बेहतर है कि सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश आप अपने आप ही करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इन पर कितना दबाव डालना है, यह आपसे बेहतर कोई नहीं बता सकता।
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